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Kaimur Top News: सरकार के निश्चय पर फिर रहा है पानी ..

- नाला जाम होने से है बड़ी परेशानी. कैमूर टॉप न्यूज़, चाँद: कैमूर जिला के चाँद गॉव का मुख्य सड़क पर नाला जाम होने के कारण सडक पर पानी लगा हुआ है. यह समस्या लगातार कई वर्षो से बनी हुई है. हालांकि, इस समस्या पर कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है. बता दें कि लगभग 400 छात्र इसी रास्ते से जाते आते हैं. दो गाँव धोबहा व पाढ़ी को यही मुख्य सड़क जोड़ती हैं. स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया कि सडक पर पानी भरने का मुख्य कारण नाला जाम का होना है. लगातार दो साल से नाला जाम होने से समस्या बनी है. एक बार नाला की सफाई कुछ दिन पूर्व हुई. लेकिन नाला जो सड़क क्रास करके नहर मे पानी जाता है. वह मेन पाइप की सफाई नही हो पाई. जिसके वजह से यह समस्या बनी है. कई बार लोगों ने चन्दा इकट्ठा करके सफाई करायी लेकिन समस्या जैस की तस बनी रही. अधिकारी से नेता तक किसी की नजर इस मार्ग पर नही पड़ी है. कई बार बीडीओ से कहने के बाद भी इसका सही समाधान नही हो सका. जबकि, गांव के विकास कार्यों की जिम्मेवारी अब सिर्फ मुखिया ही नहीं सरकार भी ले ली है. सरकार ने किया है निश्चय होना है वार्डों का विकास: यहाँ बता दें कि सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पंचायत के हर वार्ड सदस्य को विकास कार्यों में सहयोगी बनाने का निर्णय लिया था. मुख्यमंत्री के सात निश्चय में राज्य के एक लाख 14 हजार 733 वार्ड सदस्यों को भागीदार बनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना का क्रियान्वयन अब इन वार्ड सदस्यों के माध्यम से किया जायेगा. पंचायती राज विभाग ने इसका निर्णय ले लिया है. ग्राम सभा के सदस्य करेंगे निर्णय: विभाग का निर्णय है कि योजनाओं का चयन वार्ड सभा और ग्राम सभा के द्वारा किया जायेगा. योजना का कार्यान्वयन वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में समिति गठित कर ग्राम पंचायतों द्वारा कराया जायेगा. राज्य में 8391 पंचायतें हैं. सामाजिक-आर्थिक व जाति आधारित जनगणना 2011 के आधार पर एक पंचायत के एक वार्ड की औसत अनुमानित आबादी करीब 967 होती है. इसके अनुसार प्रति वार्ड में घरों की संख्या 155 औसतन है. इन घरों तक गली-नाली का निर्माण किया जाना है. करोड़ों रुपयों का होना है खर्च: पंचायती राज विभाग द्वारा हर पंचायत में नल का जल की दोनों योजनाओं के कार्यान्वयन पर प्रति पंचायत एक करोड़ 69 लाख 82 हजार रुपये खर्च का अनुमान तैयार किया गया है. इसके लिए मानकों का प्रॉक्कलन तैयार किया जाना है. ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा इस कार्य में मदद ली जायेगी. साथ ही विभाग ने निर्णय लिया है कि नाली-गली योजना के लिए आवश्यक हुआ तो भू-अर्जन भी किया जायेगा. चार वर्षों में इस योजना के क्रियान्वयन पर 142 अरब 49 करोड़ 58 लाख रुपये खर्च होंगे. मगर सरकार की सात निश्चय योजना फेल नजर आती दिख रही है. जिले में हर गाँव में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा मगर इसपर कोई ध्यान नहीं. संवाददाता देवानंद पांडेय




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