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2019: छोटे मुद्दों से नहीं मिलती 'इतनी बड़ी जीत' - Election Result Analysis

2019 का लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है और इस चुनाव में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार गठन की ओर बढ़ चुकी है. कई सारे आंकलनों में नरेंद्र मोदी की भारी जीत का कई तार्किक/ अतार्किक पक्ष ढूंढा गया और महीनों तक ढूँढा जाता रहेगा!

किसी ने जातीय समीकरण और सोशल इंजीनियरिंग को इस विशाल बहुमत का कारण बताया तो किसी ने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को इसकी जड़ बता डाला. किसी ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक को इसका श्रेय दिया तो किसी ने अमित शाह की संगठनात्मक क्षमता को इससे जोड़ा. इसी प्रकार से इकॉनमी, प्रधानमंत्री की मेहनत, विपक्ष की कमजोरी सहित तमाम केंद्रीय मुद्दों और सैकड़ों, हज़ारों स्थानीय मुद्दों को गिनाया जा सकता है.

पर क्या वाकई इन सभी मुद्दों को मिलाकर यह बड़ी जीत संभव है. आप जवाब दें इससे पहले आपको बता दें कि भारत की आजादी के तकरीबन 70 साल बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी तीसरे ऐसे व्यक्ति हैं जो दूसरी बार इतने विशाल बहुमत के सहारे सत्ता में अपने दम पर आए हैं.

सच कहा जाए तो इतने विशाल बहुमत और उसके पीछे के कारणों को समझने के लिए आपको अपना हृदय और मस्तिष्क उसी अनुपात में विशाल करना होगा. निश्चित रूप से आप संकुचित दृष्टि से, एकपक्षीय नजरिये से इसे समझने में सफल नहीं होंगे.

PM Modi's Great Victory, because of their great Vision


भारतीय जनता पार्टी को एक मजबूत राजनीतिक आधार देने वाले और उसे पार्टी लाइन से हटकर बाहरी दुनिया में स्वीकार्य बनाने वाले अटल बिहारी बाजपेई इस संदर्भ में कहते हैं कि-

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता 

निश्चित रूप से यह जीत छोटे मुद्दों के आधार पर...

पूरा लेख यहाँ पढ़ें: http://bit.do/2019electionresults






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