Kaimur Top News: बक्सर लोकसभा सीट: नए युवा मतदाता तय करेंगे किसके सिर पर सजेगा सांसद का ताज...
कैमूर टॉप न्यूज़,कैमूर: बक्सर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा सीट आती है इस बार नए युवाओं वोटरों की संख्या बढ़ी है लोकसभा चुनाव में जहां विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2019 मे कुल 18 लाख 6 हजार चार वोटर हो गए हैं वर्ष 2014 में कुल 16लाख 40 हजार 628 मतदाता थे. इस बार वर्ष 2019 लोकसभा के चुनाव में वर्ष 2014 चुनाव की तुलना में मतदाताओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है.गौरतलब है की बक्सर संसदीय लोक सभा चुनाव में कई बार विभिन्न पार्टी के नेताओं का उतरांव चढ़ाव जनमानस को देखने को मिली है.इस सीट पर कई दिग्गज नेताओं को मात खाते देखी गयी है.कई नेताओं को जनता जीत का ताज पहनाकर प्रतिनिधित्व करने का सुनहरा अवसर दी है.बक्सर संसदीय क्षेत्र के लिए चुनाव में बिजली पानी स्वास्थ्य शिक्षा मुख्य एजेंडा रही है.नहरों में पानी दिलाने को लेकर नेताओं ने अपना एड़ी चोटी का पसीना एक कर देते रहे.जिसका जीता जागता परिणाम लोक सभा या विधानसभा का चुनाव है.जो आप को स्पष्ट तौर पर विकास का खाका पिछले वर्षों का विकास दिखेगा.बड़े बुजुर्गों के कहावत के रूप में माने तो किसी भी कार्यो में लोगों की अतीत को जानना बेहद जरूरी है.
ठीक उसी प्रकार से यह चुनाव भी है.जो अतीत के रूप में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से एक अच्छे उमीदवार को जीत दिला कर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका देती है .चुनाव में लोग पूर्व के बेहतर कार्यो को भी लोग इसे जोड़कर देखने लगे है.लालू राबड़ी के शासन में मंत्री रहे थिंक टैंक कहे जाने वाले जगदानन्द सिंह विधानसभा चुनाव में कभी हार का मुंह उनको देखने को नहीं मिला.पंद्रह से बीस वर्षो तक वे रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनता उनको जीत का ताज पहनाती चली गयी.वे लालू राबड़ी के सरकार में कई बार मंत्री के पद पर काबिज होते रहे.लोगो का माने तो अपने विधानसभा क्षेत्रों में बिजली निर्बाध रूप से दिलवाकर लोगों के मुख पर बिजुरिया बाबा के नाम से विख्यात हो गए थे .2009 में हुई नए परिसीमन के दौरान रामगढ़ व नुआंव प्रखंड सासाराम संसदीय क्षेत्र से कट बक्सर संसदीय क्षेत्र में जुड़ाव हो गयी.तब जगदानन्द सिंह ने बक्सर संसदीय क्षेत्र से ताल ठोक चुनावी अखाड़े में कूद पड़े थे.हालांकि इस चुनाव में पहली मर्तबा में राजद के थिंक टैंक कहे जाने वाले जगदानन्द सिंह ने भाजपा के लाल मुनि चौबे को मात्र 2238 मतों से पराजित कर जीत का सेहरा अपने नाम किया था.इस जीत ने राजद खेमे में एक इतिहास कायम कर दिया था .इससे पहले इस सीट पर राजद का कभी खाता नहीं खुला था.इससे पहले राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके उदय प्रताप सिंह व पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानन्द तिवारी को दो बार लाल मुनि चौबे से हार मिली थी,1999 में राजद के शिवानन्द तिवारी को इस सीट पर 11606 मतों से हार हुई थी.
इस बार के चुनाव में दो पुराने चेहरे आमने सामने है.मुकाबला काफी ही रोचक होने की उम्मीद है.एनडीए की ओर से भाजपा के अश्वनी चौबे व महागठबंधन के जगदानन्द सिंह आमने सामने है.दोनों दिग्गज प्रत्याशी एक दूसरे को मात देने में लगे हुए है,हालांकि 2014 की हुई चुनाव में भाजपा के अश्वनी चौबे ने जगदानन्द सिंह को हरा दिया था.इस चुनाव में जीत का कारण लोगों द्वारा मोदी लहर की मुख्य भूमिका भी मान रहे है.अगर इस सीट पर स्पष्ट तौर पर कहे तो आजादी से लेकर अभी तक इस सीट पर कांग्रेस व भाजपा का कब्जा पांच बार रहा,1962 में कांग्रेस का विजय अभियान शुरू हुआ.तो 1977 की जनता पार्टी की लहर को छोड़ लगातार 1984 तक उनका ही कब्जा रहा.फिर अभेद किला ध्वस्त करने की बारी आई,1996 में निववर्तमान सांसद तेज नारायण सिंह को हराकर पहली बार भाजपा के लालमुनि चौबे ने भाकपा से झटक लिया था.
वही 2004 तक भाजपा का कब्जा रहा,2009 में नए परिसीमन ने राजद के जगदानन्द सिंह का भाग्य साथ दिया.और वे कमल को मुरझाकर लालटेन जला दिए थे,यह सीट 24 सालों तक कांग्रेस के खाते में रही.भाजपा के कब्जे में 18 सालों तक रही,2014 के चुनाव में ददन पहलवान ने निर्दलीय तौर पर चुनावी अखाड़े में कूद कर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया था.बक्सर लोक सभा सीट पर स्वतंत्र उम्मीदवार से लेकर वामदलों का कब्जा रहा.आजादी के बाद दो चुनावो में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डुमरांव के महाराज कमल सिंह विजयी रहे.जबकि 1989 व 1991 में जनता दल के समर्थन में वाम दल से सीपीआई के उम्मीदवार तेज नारायण सिंह चुनाव जीते थे.
-कैमूर टॉप न्यूज़ के लिए मुबारक अली की खास रिपोर्ट



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