Header Ads

Kaimur Top News: बेतहाशा तपिश व गर्मी में रोजा रखने में बड़ों से पीछे नहीं नन्हें रोजेदार..


कैमूर टॉप न्यूज़, कैमूर: माहे रमजान में बुजुर्गों व युवाओं के अलावा बच्चें भी  रोजा रखकर इबादत में मशगूल हैं रमजान माह मे मुस्लिम समुदाय के उत्साह देखते ही बन रहा नन्हे रोजदार बढ़-चढ़कर बड़े का साथ दे रहे हैं. कहीं नन्हे रोजेदार पहली बार रोजा रखे इनके अभिभावक भी खूब ख्याल रख रहे हैं .इस माह में  मुस्लिम समुदाय के लोग एक महीने का रोजा रखते हैं इस पवित्र महीना रमजान में रोजा रखने की बड़ी अहमियत है.

 बरकत वाले इस महीने में नन्हें रोजेदोरों ने भी इस बेतहाशा गर्मी और चिलचिलाती धूप में रोजा रखकर इबादत कर रहे है.इस रोजा में सुबह सहरी और शाम इफ्तार तक कुछ भी खाया पिया नहीं जाता है जो एक महीना तक लगातार चलता रहता है. इसमें छोटे से लेकर बड़े तक रोजा रखते हैं शाम को ही इफ्तार एक साथ बैठकर खोलते है उस समय ऐसा महसूस होता है .मां पिता एवं भाई बहन एक साथ बहुत ही खुशी हो होता है की रमजान का महीना ऐसा मौका मिला रोजा रख कर भी कुरान का तिलावत करना और साथ-साथ नवाज पढना तिलावत करना इस महीने में शवाब मिलता है.रमजान का पंद्रहवां रोजा रखने वाले नन्हें रोजेदारों में शामिल दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के सरैया गांव निवासी दिलशाद अली (10), खुशनुमा खातुन (12) व रुख्खशाना खातुन (15) इस कड़ी तपिस धुप वं भीषण गर्मी व उमस में पहली बार रोजा रख लोगों को चौका दिया है.दोपहर बाद इन रोजेदारों को प्यास की तलब तो हुई लेकिन उनका इरादा पक्का था. परिवार के लोगों ने रोजेदारों की हालत देख तमाम तरह का प्रलोभन देते रहे लेकिन वे रोजा तोड़ने को तैयार नहीं हुए.


 दिलशाद व खुशनुमा का कहना है कि मां और परिवार वालों को रोजा रखते देख रोजा रख रहे.दोनों का कहना है कि सुबह की सहरी व शाम को परिवार वालों के साथ इफ्तार करना अच्छा लगता है. रमजान माह में रोजा रखने के साथ-साथ पांचों वक्त की नमाज भी पढ़ते हैं. खुशनुमा पहली बार रोजा रखने से काफी उत्साहित है .वहीं दिलशाद अली ने बताया कि साल भर में एक बार माहे रमजान का महीना आता है. यह महीना काफी हमको अच्छा लगता है. शाम को चहल-पहल रहता है .अफ्तारी में बहुत कुछ खाने को मिलता है. लोग एक दूसरे से काफी खुश मिलते जुलते हैं. यह सब देखकर अच्छा लगता है. इसमें रोजा रखना आसान हो जाता है और पता भी नहीं चलता. मौलाना फुजैल अहमद ने बताया की रमजान महीने में फितरा और जकात अगर जरूरतमंदों को दी जाए जो इसके हकदार हैं, तो बेहतर है इसके लिए हमें अपने आसपास ऐसे लोगों को देखना चाहिए जो गरीब हो और अल्लाह की इबादत करते हो इसके बाद फितरा और जकात की रकम यतीमनखाने मे दी जा सकती है. अगर रिश्तेदार जरूरतमंद है तो फितरा उसको भी दिया जा सकता है. रमजान में इसकी बड़ी फजीलत है. जिस तरह जकात हमें दूसरों की मदद करना सिखाता है उसी तरह रोजा की भूख प्यास हमें गरीबों के दर्द का एहसास कराती है.

कैमूर टॉप न्यूज़ के लिए मुबारक अली की रिपोर्ट


No comments