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उम्र छोटी, हौसला विशाल—कमलेश कुमार का साहस बना देश की पहचान

देश ने झुककर किया सलाम—वीर बालक स्वर्गीय कमलेश कुमार के साहस को राष्ट्रपति द्वारा सम्मान।

कैमूर टॉप न्यूज,भभुआ:
शुक्रवार को एक साथ गर्व, सम्मान और गहरी भावुकता का साक्षी बना, जब जिले के मोहनिया प्रखंड अंतर्गत जयपुर भदवलिया गांव के निवासी स्वर्गीय कमलेश कुमार के अद्वितीय साहस, मानवता और परोपकार की भावना को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 के लिए उन्हें मरणोपरांत प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (Prime Minister’s Rashtriya Bal Puraskar – PMRBP) से सम्मानित किया गया, जिसे नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में उनके परिजनों को प्रदान किया गया।

स्वर्गीय कमलेश कुमार मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में वह कार्य कर गए, जिसे करने में बड़े-बड़े लोग भी हिचकिचा जाते हैं। दुर्गावती नदी में डूबते एक अन्य बच्चे की जान बचाने के प्रयास में उन्होंने अपनी जान न्योछावर कर दी। यह घटना न केवल उनके गांव या कैमूर जिले तक सीमित रही, बल्कि पूरे राज्य और देश में मानवता, साहस और निस्वार्थ सेवा की मिसाल के रूप में सामने आई। एक मासूम बालक का यह अतुलनीय साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा देशभर से चयनित असाधारण प्रतिभा और वीरता का परिचय देने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। वर्ष 2025 के लिए स्वर्गीय कमलेश कुमार का चयन मरणोपरांत किया गया, जो इस बात का प्रमाण है कि उनका बलिदान राष्ट्र ने कभी भुलाया नहीं। यह सम्मान यह दर्शाता है कि सच्चा साहस उम्र का मोहताज नहीं होता।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से चयनित बच्चों और उनके परिजनों को आमंत्रित किया गया था। स्वर्गीय कमलेश कुमार के परिवार को भी जिला प्रशासन, आईसीडीएस (ICDS) के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी तथा महिला एवं बाल विकास निगम, कैमूर के जिला परियोजना प्रबंधक की देखरेख में दिल्ली भेजा गया था, ताकि वे यह सम्मान ग्रहण कर सकें।

इस संबंध में कुमारी प्रियंका राज, जिला परियोजना प्रबंधक सह नोडल पदाधिकारी, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, महिला एवं बाल विकास निगम, कैमूर ने जानकारी देते हुए बताया कि नई दिल्ली में आयोजित इस भव्य समारोह में महामहिम राष्ट्रपति महोदय के कर-कमलों द्वारा यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्गीय कमलेश कुमार के पिता को प्रदान किया गया। समारोह के दौरान पूरे सभागार में भावुक वातावरण देखने को मिला और उपस्थित सभी लोग इस बालक की वीरता को नमन करते नजर आए।

स्वर्गीय कमलेश कुमार का जीवन भले ही अल्पकालिक रहा हो, लेकिन उनका साहस और बलिदान अमर हो गया है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची मानवता वही है, जो दूसरों की जान बचाने के लिए स्वयं को जोखिम में डाल दे। उनका यह कृत्य न केवल बच्चों बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा है कि संकट के समय मानवता और करुणा सर्वोपरि होनी चाहिए।
इस राष्ट्रीय सम्मान की खबर जैसे ही कैमूर जिले में पहुंची, पूरे जिले में गर्व की लहर दौड़ गई। जयपुर भदवलिया गांव में लोगों ने स्वर्गीय कमलेश कुमार को याद करते हुए उनकी वीरता को नमन किया। ग्रामीणों ने कहा कि कमलेश भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका नाम और उनका साहस सदैव अमर रहेगा। गांव के लोग उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस राष्ट्रीय सम्मान को पूरे गांव और जिले का सम्मान मान रहे हैं।

जिला प्रशासन, कैमूर ने भी इस अवसर पर स्वर्गीय कमलेश कुमार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कमलेश का बलिदान समाज के लिए एक संदेश है कि मानवता, साहस और सेवा की भावना सबसे बड़ी पूंजी है। जिला प्रशासन ने उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के माध्यम से स्वर्गीय कमलेश कुमार को मिला यह सम्मान यह भी दर्शाता है कि सरकार बच्चों की असाधारण प्रतिभा, साहस और सामाजिक योगदान को पहचानने और सम्मानित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पुरस्कार न केवल एक सम्मान है, बल्कि समाज को सही दिशा में सोचने और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।

निस्संदेह, स्वर्गीय कमलेश कुमार का नाम अब देश के उन वीर बालकों की सूची में दर्ज हो चुका है, जिन्होंने अपने साहस और त्याग से मानवता की मिसाल कायम की है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता रहेगा कि सच्ची बहादुरी दूसरों के लिए जीने और जरूरत पड़ने पर अपने प्राणों की आहुति देने में है। कैमूर जिला अपने इस वीर सपूत पर सदैव गर्व करता रहेगा।

रिपोर्ट - अभिषेक राज






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