गर्दनीबाग के आश्वासन पर भी अमल नहीं, राजस्व कर्मचारी फिर सड़क पर उतरने को तैयार
कैमूर टॉप न्यूज,भभुआ:जगजीवन स्टेडियम, मोहनिया में बिहार राज्य भूमि सुधार राजस्व कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले सहित पूरे राज्य के राजस्व कर्मचारियों की समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर गहन चर्चा की गई। बैठक में बिहार अराजपत्रित राजस्व कर्मचारी संघ (गोप गुट) के जिला अध्यक्ष सोनू कुमार, जिला सचिव पंकज कुमार, जिला उपाध्यक्ष अमन कुमार, राज्य संघ के सचिव हरीश कुशवाहा सहित कैमूर जिले के सभी अंचलों से आए राजस्व कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक का माहौल पूरी तरह गंभीर रहा और कर्मचारियों में सरकार व विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखने को मिली।
बैठक को संबोधित करते हुए संघ के नेताओं ने कहा कि भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव, पटना द्वारा पूर्व में राजस्व कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर सहमति व्यक्त की गई थी, लेकिन आज तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। इस उपेक्षा के कारण पूरे बिहार के राजस्व कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। नेताओं ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 11 हजार है, जबकि वर्तमान में पूरे बिहार में मात्र करीब 3,500 राजस्व कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण एक राजस्व कर्मचारी को दो से तीन हल्का का अतिरिक्त प्रभार दिया जा रहा है। इससे न केवल कार्य का बोझ बढ़ रहा है, बल्कि समय पर काम पूरा कर पाना भी मुश्किल हो गया है।
राजस्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा राजस्व से जुड़े सभी कार्यों के लिए जो समय-सीमा निर्धारित की गई है, वह एक कर्मचारी और एक हल्का को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके विपरीत, कर्मचारियों से दो या तीन हल्का का काम लिया जा रहा है। तय समय पर कार्य पूरा नहीं होने पर बिना स्पष्टीकरण पूछे निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे कर्मचारियों में भय और मानसिक दबाव का माहौल बना हुआ है।
बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि चुनाव के समय से लेकर अब तक अभियान, फॉर्मर रजिस्ट्री सहित अन्य सरकारी कार्यों के नाम पर कर्मचारियों की छुट्टियां लगातार रद्द की जा रही हैं। इसके अलावा पूजा, मेला और जुलूस जैसे आयोजनों में मजिस्ट्रेट ड्यूटी लगाए जाने के कारण राजस्व कर्मचारियों को राजपत्रित अवकाश तक नहीं मिल पा रहा है। इससे कर्मचारियों का पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
संघ के नेताओं ने बताया कि पूर्व में 17 सूत्री मांगों को लेकर पटना के गर्दनीबाग में धरना और हड़ताल किया गया था। उस दौरान विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा लिखित आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद आज तक किसी भी मांग पर अमल नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि बिहार सरकार और भूमि सुधार विभाग शीघ्र ही राजस्व कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो राज्यभर के सभी राजस्व कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन और हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन कर्मचारियों अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
रिपोर्ट:- M.D असरफ



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