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Kaimur Top News: संसाधनों की कमी से जूझ रहा मैट्रिक टॉपर देने वाला विद्यालय ..



कैमूर टॉप न्यूज ,कैमूर: इस वर्ष कैमूर जिले को मैट्रिक में टॉपर देने वाला कुदरा का राम जानकी बालिका विद्यालय, सकरी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है.प्रखंड का एकमात्र राजकीय बालिका उच्च विद्यालय होने के बावजूद यह उपेक्षा का घोर शिकार है. उपेक्षा का आलम यह है कि विद्यालय में छात्राओं के बैठने व खेलने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है.शिक्षकों का भी अभाव है. फिर भी अपने को जनप्रतिनिधि व समाजसेवी कहने वाले लोग बेपरवाह बने हुए हैं. बताते चलें कि इसी स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा मधुप्रिया ने इस वर्ष बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा में 467 अंक लाकर पूरे जिले में टॉप किया है. उसे गणित में तो 100 में 100 अंक मिले हैं. मधु प्रिया की उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि विद्यालय पर सरकार व प्रतिनिधियों का ध्यान रहे तो यहां की छात्राएं अपने प्रदर्शन से जिले का मान बढ़ाने का दम रखती हैं. यह भी बताना लाजिमी रहेगा कि इस विद्यालय में कुदरा प्रखंड ही नहीं बल्कि आसपास के कई अन्य प्रखंडों से छात्राएं भी पढ़ने के लिए आती हैं.



पहले यहां दसवीं तक की पढ़ाई होती थी लेकिन अब इंटर स्तर की पढ़ाई भी होने लगी है. विद्यालय में करीब 1500 छात्राएं पढ़ा करती हैं.जिनमें नवम व दशम वर्गों में हर एक में उनकी संख्या आमतौर पर 500 से अधिक हुआ करती है। छात्राओं की बड़ी संख्या देखते हुए नवम एवं दशम वर्गों में चार चार सेक्शन बनाने पड़ते हैं. जिनमें हर सेक्शन में आमतौर पर 150 से अधिक छात्राएं रहती हैं। लेकिन भूमि व कमरों के अभाव में छात्राओं को पढ़ाई के लिए बैठने में भी परेशानी होती है. शिक्षक सुनील कुमार बताते हैं कि विद्यालय में हाल के दिनों में बेंच, डेस्क, पेयजल व शौचालय की व्यवस्था की गई है. लेकिन जगह के अभाव में छात्राओं के अध्ययन, अध्यापन व उनके सर्वांगीण विकास में बाधा पहुंचती है.अफसोस की बात यह है कि आसपास में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि बिना उपयोग के पड़े होने के बावजूद प्रखंड में बालिकाओं की माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के एकमात्र राजकीय संस्थान के विकास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की पहल नहीं की जाती है. सरकारी तंत्र व जनप्रतिनिधियों द्वारा विद्यालय की उपेक्षा का आलम यह है कि इसकी प्रबंध समिति तक का गठन नहीं किया गया है. जिसके चलते विद्यालय के विकास में अड़चनें आ रही हैं. प्रधानाचार्य विनोद सिंह बताते हैं कि विद्यालय के कोश में करीब 20 लाख रुपए पड़े हैं. लेकिन प्रबंध समिति का गठन नहीं होने के चलते उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है.



आप को  बता दें कि जिस परिसर में यह विद्यालय मौजूद है वह पूर्व में धर्मशाला हुआ करती थी. वर्ष 1979 में स्थानीय लोगों ने नारी शिक्षा के महत्व को देखते हुए धर्मशाला को बालिका विद्यालय के रूप में तब्दील करने का निर्णय लिया.तब कुछ लोगों ने उस निर्णय के प्रति विरोध जताया था. लेकिन आज उस सही फैसले का ही सुफल है कि प्रखंड क्षेत्र व आसपास के कई दर्जन गांवों की बच्चियां मैट्रिक या उससे आगे की पढ़ाई कर पा रही हैं. साथ ही मधु प्रिया जैसी बच्चियां उत्तम प्रदर्शन कर प्रखंड व जिले का मान बढ़ा रही हैं.





 उल्लेखनीय तथ्य यह है कि राम जानकी बालिका उच्च विद्यालय के पास एनएच दो पर अंडरपास नहीं होने के चलते यहां पढ़ने वाली छात्राओं का जीवन खतरे में रहता है.विद्यालय में पढ़ने वाली करीब डेढ़ हजार छात्राओं को हर रोज एनएच 2 के ऊपर चल कर विद्यालय आना जाना पड़ता है. जिसके चलते कभी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है. शिक्षक सुनील कुमार कहते हैं कि यदि एनएच दो पर अंडर पास रहता तो छात्राओं को हाइवे के ऊपर चलकर खतरनाक तरीके से सड़क पार करने को मजबूर होना नहीं पड़ता.





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