Header Ads

नवरात्र में लगता है भूतों का मेला,डॉक्टर के यहाँ जाने के बदले झाड़ फूंक में करते है लोग विश्वास..

कैमूर टॉप न्यूज़, भभुआ: शारदीय नवरात्र में लगता है भूतों का मेला. एक दो नहीं हजार की संख्या में भूतों का लगता है जमघट,यह सच है कि कैमूर जिले के चैनपुर स्थित बाबा हरसू ब्रह्म स्थान में शारदीय नवरात्र में भूतों का मेला लगता है,और यहाँ आने के बाद मरीज ठीक हो जाता है पूरा नवरात्र में सुबह से शाम तक बाबा हरसू ब्रह्म मंदिर में मानसिक रोगियों का जमावड़ा लगता है,ऐसा नहीं कि यह शिक्षित नहीं होते पढ़े लिखे नौकरी पेशा वाले भी अपने परिवार के ऊपर होने वाले परेसानी,निःसन्तान ,बीमारी से ग्रसित मरीज जो डॉक्टर से इलाज करा कर तक गए पर उनका बीमारी ठीक नहीं हुआ पर जब हरसू ब्रह्म दरबार पहुँचते है तो ठीक हो जाते ऐसा मंदिर आए पीड़ितों का कहना है।पूरे नवरात्र मंदिर परिषर में भूतों के खेलते रोते चीखते चिलाते देख सकते है।

विज्ञान युग में आज भी लोग अंधविश्वास में जीने को मजबूर


डॉक्टर के यहाँ जाने के बदले झाड़ फूंक में करते है विश्वास यह परम्परा वर्षो से चलते आ रहा है ,हम आज चांद पर कदम रख चुके है पर आज लोग डॉक्टर से इलाज कराने के बदले झाड़ फूंक पर विश्वास करते है, ऐसा भी नहीं कि सभी अशिक्षित है कई लोग ऐसे है को खुद डॉक्टर है पर आज भी बाबा के दरबार को श्रद्धा मानते है,बनारस के डॉ बी के दुबे और उनकी पत्नी बंदना दुबे बताते है कि उनके घर वंश नहीं चल रहा था जन्म के बाद मृत्यु हो जाती थी पर उनकी माँ जब से बाबा हरसू ब्रह्म स्थान आना शुरू कि तो उनका वंश चलने लगा।इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील निखिल मिश्रा का कहना है कि मेरा तबियत खराब था कोरोना जैसे महामारी को मैने खुद पूरे संसार मे लाया हो ऐसा महसूस होता था साथ ही मुझे सिर्फ देवियां नजर आती थी पर जब मैं हरसू ब्रह्म स्थान आया तब से सब ठीक है।वही साबित मिश्रा जो यूपी के मिर्जापुर से पूरे परिवार के साथ आई उनका कहना है कि जब से मैं यहाँ आ रही हूं तब से पूरा परिवार ठीक है ।राबड्स गंज के ममता पांडेय का कहना है कि मेरे पति पर किसी ने काला साया डाल दिया था कई डॉक्टर से दिखाया पर मेरे पति ठीक नहीं हुए जब से यहाँ आना शुरू की सब ठीक है।


बाबा हरसू ब्रह्म कि क्या है कहानी

मंदिर के संयोजक राज कुशोर चैनपुरी बाबा के अनुसार ऐसा मान्यता है कि दो राक्षस उत्कल और ब्रजदन्त दोनो ने कभी आतंक मचाया था सभी देवता परेसान हो कर भगवान शंकर का तपस्या करने लगे तब शंकर ने उत्कल को त्रिशूल से बध कर दिया तो ब्रजदन्त ने महिला रूप धारण कर लिया तो शंकर ने उसे कलयुग में मिलने का श्राप दिया वही शंकर के रूप में हरसू बाबा ने अंतरित हुए और ब्रजदन्त राक्षस के रूप में राजा शालिवाहन के पत्नी माणिक मति अवतरित हुई ,बाबा हरसू राजा शालिवाहन के राजपुरोहित थे राजा अपने सभी शुभ कार्यो को हरसू बाबा के आदेश से कराते थे,पूर्व के श्राप के कारण राजा का वंश नहीं आगे बढ़ा तो राजा ने आने पुरोहित हरसू बाबा से पूछा की मेरा वंश कैसे चलेगा तो उन्होंने दूसरी शादी करने का सलाह दी तो छतीसगढ़ के राजा भूदेव सिंह की पुत्री ज्ञान कुँवरि से शादी हो गई जिससे दुखी होकर राजा के पहली रानी ने हरसू बाबा को प्रताड़ित कराने लगी,उनका महल को भी ध्वस्त करा दी जिससे दुखी हो कर हरसू बाबा ने राजा के महल में 21 दिन बिना अन्य जल के पड़े रहे उसके बाद उन्होंने अपना प्राण दे दिया,इसकी सूचना जैसे ही माता हंस रानी को मिली तो हाथ मे दीपक हरसू बाबा के नाम पर तप करते जल कर भस्म हो गई उसके बाद राजा शालिवाहन का बिनास हो गया ,तब से हरसू ब्रह्म पूजने लगे आज देश विदेश से भी लोग आते है और अपनी समस्या का निदान करवाते है,भूत पिचास का सुप्रीम कोर्ट माना जाता है।

No comments