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केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोले किसान नेता राकेश टिकैत..

कैमूर टॉप न्यूज़, भभुआ: भारतमाला परियोजना के तहत बनारसी से कोलकाता तक एक्सप्रेसवे बनाने का काम सरकार के द्वारा पास किया गया है.जिसमें बिहार के कैमूर और रोहतास जिला के किसानों की जमीन को अधिकृत करने के लिए सरकार ने अधिकारियों को संदेश दिया है. ताकि चिन्हित जमीन पर एक्सप्रेसवे का निर्माण कर जल्द से जल्द पूरा किया जाए. लेकिन इस परियोजना को लेकर कैमूर और रोहतास के किसान सरकार से ना कुछ दिख रहे हैं.क्योंकि किसानों का साफ-साफ कहना है कि सरकार द्वारा जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है.वही इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकट और बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने भभुआ के लक्ष्मी भवन में किसान सभा का आयोजन किया जिसमें किसानों द्वारा अपनी मांगों को रखा गया.
मीडिया से बातचीत द्वारा राकेश टिकट ने कहा कि बिहार में किसानों से लूट हो रही है और बिहार सरकार जल्द से जल्द बिहार में मंडी कानून को लागू करें और फिर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखें.वही आगे उन्होंने कहा कि हम दूध से भी बहुत प्यार करते हैं, और उसकी पूजा करते हैं लेकिन सामने से हम दूध से कहेंगे कि तुम हमें मक्खन दो तो वह नहीं देगा जब रात में दूध की पिटाई होती है.तब जाकर वह मक्खन देता है किसी को पता भी नहीं चलता और सुबह फिर हम दूध की पूजा करने लगते हैं.हम लोग अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे अगर सरकार हमारी बातों को नहीं मानती है,तो हम सब किसान बिहार में एक बहुत बड़ा किसान आंदोलन करने के लिए तैयार रहेंगे.

वही सुधाकर सिंह ने मीडिया कर्मियों से बातचीत की दौरान कहां की किसने की दो समस्या है पहले भारतमाला परियोजना के तहत बंद है एक्सप्रेसवे के लिए तू जमीन सरकार किसानों से ले रही है उसका मुआवजा उचित ढंग से नहीं दे रही है जो मुआवजा मिला है वह ₹100 की जगह ₹10 ही मिलना है अगर थोड़ा बहुत ऊपर नीचे होता तो किसान मान जाते , वही दूसरा मामला पूरे बिहार का मामला है मंडी कानून को लागू करना जिसके लिए हम लोग 3 दिन का यात्रा पर निकले हैं कैमूर रोहतास औरंगाबाद आरा और पटना में हम लोग किसान सभा कर रहे हैं 1 महीने बाद हम लोग उत्तरी बिहार में भी किसान सभा करेंगे और दिसंबर तक के निर्णय लेंगे की मंडी कानून पर सरकार आगे जाकर किसानों से बात करें वरना भारतीय किसान यूनियन के देश भर के सभी किसान सरकार के खिलाफ  प्रदर्शन करेंगे ।रही बात सरकार के मानने की तो नरेंद्र मोदी भी 13 महीने में मान गए थे और जो किसान आंदोलन में भाग नहीं ले सकते वह केवल एक टाइम का खाना खाए ।

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