Kaimur Top News: कैमूर जिले में बिजली बनी है अभी भी समस्या
कैमूर टॉप न्यूज़,कैमूर : धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाले कैमूर जिले से उत्पादित बिजली से बिहार को रौशन करने की योजना अधर में लटकी हुई है. यहां की पनबिजली परियोजनाएं कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन सकी. कैमूर पहाड़ी पर अवस्थित कई ऐसे गांव हैं जहां आजतक बिजली नहीं पहुंची.आदिवासी ग्रामीणों ने बल्ब तक नहीं देखा है. साल दर साल महंगी होती बिजली से उपभोक्ता परेशान हैं. उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार भी हाथ पांव मार रही है.
ऐसी स्थिति में अगर कैमूर जिले में प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाओं पर ध्यान दिया जाता तो इससे कैमूर के साथ-साथ पूरे बिहार को रौशन किया जा सकता था. सरकार के सकारात्मक पहल के अभाव में कैमूर में प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाएं खटाई में पड़ी हुई हैं.पनबिजली परियोजनाओं को मूर्त रुप देने के लिए सरकारी तौर पर पहल भी शुरू की गई थी, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. इस पर
न तो सरकार का ध्यान है न ही जनप्रतिनिधों का.
इन पनबिजली परियोजनाओं को तैयार कर दिया जाए तो इनसे तीन हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. इससे बिजली के क्षेत्र में जहां कैमूर आत्मनिर्भर होगा, वहीं यहां की बिजली से पूरा बिहार रौशन हो सकेगा. ठंडे बस्ते में पड़ी पनबिजली परियोजनाओं को सरकार के सकारात्मक पहल की दरकार है.
कब बुना गया गया पनबिजली परियोजनाओं का ताना-बाना
15 जून 1989 को पटना के गांधी मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इन परियोजनाओं के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. तब से यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा है.सासाराम संसदीय क्षेत्र के सांसद रहे बाबू जगजीवन राम केंद्र में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री रहे.उनके बाद उनकी विरासत संभालने वाली उनकी बेटी मीरा कुमार केंद्रीय मंत्री के अलावा लोकसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामय पद को सुशोभित कर चुकी हैं, लेकिन कैमूर की पनबिजली परियोजनाओं को किसी ने सुधि नहीं ली. वर्ष 2011 में बिहार के तत्कालीन भवन निर्माण मंत्री एवं सासाराम के वर्तमान सांसद छेदी पासवान ने इन परियोजनाओं को मूर्त रूप दिलाने के लिए पहल की थी. तत्कालीन ऊर्जा मंत्री से मिलकर कैमूर में प्रस्तावित पांच पनबिजली परियोजनाओं को पूरा कराने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया जिससे परियोजनाएं लंबित रह गई.बीते लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में बनी भाजपा सरकार से जिलेवासियों को काफी उम्मीद थी लेकिन पांच साल बाद भी आस अधूरी रह गयी.
किस परियोजना से कितना होगा बिजली का उत्पादन
जिले में प्रस्तावित पन बिजली परियोजनाओं से तीन हजार मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है. इसमें तेल्हाड़ कुंड से 400 मेगावाट, सीना फदर से 345, पंचगोटिया से 225, हथियादह दुर्गावती से 1600 एवं कोहिरा से 400 मेगावाट बिजली तैयार करने की योजना है.
मदद के लिए विदेशी कंपनियों ने आगे बढ़ाया था हाथ
इस प्रस्ताव के आने के बाद कुछ विदेशी कंपनियों ने कैमूर में आकर उक्त परियोजना स्थलों का निरीक्षण किया था.कैमूर जिला में प्रस्तावित पनबिजली परियोजना में जापान की इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव एजेंसी ने रुचि दिखाई थी.हथियादह दुर्गावती में पनबिजली परियोजना की पंप स्टोरेज स्कीम को स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू की थी. कंपनी ने 1600 मेगावाट क्षमता की यूनिट स्थापित करने और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन भी अपने स्तर से तैयार करने की पेशकश की थी.इसके लिए वित्त विभाग ने ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार से 64 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने के लिए जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव एजेंसी को निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया था. निवेश के दृष्टिकोण से भी इसको लाभकारी माना गया था. बिहार राज्य जल विद्युत निगम ने ही निवेशक की तलाश की थी. राज्य के पर्यावरण एवं वन विभाग ने इन परियोजनाओं के लिए अपना अनापत्ति प्रमाणपत्र भी दिया. इसके बाद विदेशी संस्था के विशेषज्ञों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण भी किया.इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में है.
परियोजना की खास बातें
आज ग्लोबल वार्मिंग का खतरा महसूस किया जा रहा है.इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ चुका है.पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इन पनबिजली परियोजनाओं का काफी महत्व है.सबसे बड़ी बात है कि बड़ी परियोजना होने के बावजूद इनसे बिजली तैयार करने में कार्बन का उत्सर्जन नहीं होगा. इससे पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है. जो काफी महत्वपूर्ण है.






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