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मोहनिया प्रखंड कार्यालय परिसर में न पेयजल की व्यवस्था न शौचालय की

कैमूर टॉप न्यूज़,कैमूर: मोहनिया प्रखंड कार्यालय परिसर की समस्याओं को देखने के बाद दीपक तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ होती है.परिसर में न तो पेयजल की व्यवस्था है न हीं शौचालय की.प्रखंड कार्यालय परिसर में प्यास बुझाने के लिए पूर्व में  परिसर में लगाए गए सभी चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं.जिसके कारण सरकारी कार्यों से प्रखंड मुख्यालय आने वाले लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ता है.जिस परिसर में कई पदाधिकारियों का कार्यालय हो वहां ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो तो अन्य जगहों की बात ही बेमानी है. अप्रैल माह में तपते सूरज को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है की इस वर्ष भीषण गर्मी पड़ेगी. ऐसे में पेयजल की समस्या गंभीर होगी. यह मुख्यालय 63 वर्षों से कितनी यादों को अपने अंदर समेटे हुए है. 30 जनवरी 1956 को मोहनियां में प्रखंड सह अंचल कार्यालय की स्थापना हुई थी. तब से इस परिसर का काफी विकास हुआ है.भले ही प्रखंड व अंचल कार्यालय जर्जर है लेकिन कई विभागों के नए कार्यालय बन चुके हैं. वैसे तो पूरा कैमूर जिला ओडीएफ घोषित हो चुका है. बीते 30 सितंबर को मोहनियां प्रखंड को भी ओडीएफ घोषित किया गया.

प्रखंड मुख्यालय में इस मौके पर समारोह का आयोजन किया गया था.जिसमें कैमूर के जिलाधिकारी सहित कई पदाधिकारी व जन प्रतिनिधि शामिल थे. हर गांव में प्रत्येक घर में शौचालय बनवाने वाले पदाधिकारियों को भी ड्यूटी के दौरान शौचालय की समस्या से जूझते हैं. उन्हें खुले में मल मूत्र करने में शर्मिंदगी महसूस होती है. प्रखंड मुख्यालय परिसर में अवस्थित है कई विभागों का कार्यालय-प्रखंड मुख्यालय मोहनिया परिसर में कई विभागों का कार्यालय है. जिसमें प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय, चकबंदी कार्यालय, खाद्य आपूर्ति कार्यालय, आरटीपीएस काउंटर, मनरेगा कार्यालय, अवर निबंधन कार्यालय, कृषि विभाग का कार्यालय, बीआरजीएफ सभागार, बीआरसी भवन, पुलिस निरीक्षक का कार्यालय, बाल विकास परियोजना कार्यालय इत्यादि शामिल है.

विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों को ले यहां काफी संख्या में आते हैं लोग-

प्रखंड कार्यालय में विभिन्न विभागों से संबंधित आवश्यक कार्यो को लेकर काफी लोग आते हैं. इसी परिसर में निबंधन कार्यालय होने के कारण पूरा अनुमंडल क्षेत्र के लोग जमीन जायदाद की खरीद बिक्री करने के उद्देश्य यहां आते हैं. प्रखंड कार्यालय परिसर में  पेयजल की गंभीर समस्या है. इस परिसर में लगे एक भी चापाकल चालू नहीं हैं.
मनरेगा भवन के सामने दो चापाकल खराब पड़े हैं.यहीं पर प्रखंड प्रमुख का कार्यालय है. बगल के ट्राइसेम भवन में आधार कार्ड बनता है. चापाकल खराब होने के कारण पानी के लिए लोग भटकते हैं.

 पदाधिकारी व कार्यालय कर्मी तो अपने पेयजल की व्यवस्था स्वयं करते हैं. आरटीपीएस काउंटर पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की भीड़ होती है. परिसर में करीब एक दर्जन खाद्य पदार्थों की दुकानें लगी हैं. प्यास लगने पर लोगों को मजबूरी में खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ती है. जिसके एवज में दुकानदार उन्हें पानी पिला सकें. इस परिसर में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है.जिसके कारण लोगों को मलमूत्र त्याग करने में भी परेशानी होती है.शौचालय के अभाव में महिलाओं को शर्मसार होना पड़ता है.ऐसे में लोग यही कहते हैं की पदाधिकारी गांव गांव में घुम कर लोगों को शौचालय बनाने के लिये प्रेरित करते हैं.जहां कई विभागों का कार्यालय है वहां एक भी शौचालय नहीं है.अवर निबंधन कार्यालय से सरकार को प्रति वर्ष करोड़ो का राजस्व प्राप्त होता है. समय समय पर विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण करने के लिए इस परिसर में डीएम से लेकर जिला व अनुमंडल के वरीय पदाधिकारी आते हैं.लेकिन किसी का ध्यान इस परिसर की मूलभूत समस्याओं की तरफ नहीं जाता.जिससे यह समस्या गंभीर बनी हुई है. प्रखंड कार्यालय परिसर नगर पंचायत के अंतर्गत आता है.नगर पंचायत भी इस परिसर में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में असफल रहा है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी-
इस संबंध में जब मोहनियां के बीडीओ अजय कुमार सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि प्रखंड कार्यालय परिसर में दो शौचालय का निर्माण कार्य चल रहा है. शीघ्र ही कार्य पूर्ण हो जाएगा। पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी वे गंभीर हैं.परिसर में पेयजल की व्यवस्था के लिए जल मीनार का निर्माण कराने का प्रस्ताव है.






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