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बिहार की बेटी सृष्टि ने बताया संस्कृत का महत्व, प्रतिभा के कायल हुए मोदी, किया सम्मानित ..

वाराणसी में चल रहे संस्कृत संसद महोत्सव में भारत के अनेक संस्कृत विद्वानों ने भाग लिया, जिसमें अनेकानेक विषयों पर व्याख्यान हुआ. सृष्टि उपाध्याय ने संस्कृत भाषा के महत्व के ऊपर तकरीबन आधे घंटे तक व्याख्यान देकर सबको चकित कर दिया. इस व्याख्यान के बाद उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में उन्हें पुरस्कृत किया. 

  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ संस्कृत संसद महोत्सव
  • शामिल हुए पीएम नरेंद्र मोदी तथा सीएम योगी आदित्यनाथ

कैमूर टॉप न्यूज, भभुआ : जिले के भगवानपुर थाना के सूंड गांव निवासी स्वर्गीय काशीनाथ उपाध्याय की पुत्री सृष्टि उपाध्याय ने महज 13 वर्ष की उम्र में अपनी प्रतिभा के बदौलत प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कार प्राप्त कर न सिर्फ ग्राम वासियों का बल्कि जिले और सूबे बिहार का नाम रोशन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सृष्टि उपाध्याय के "संस्कृत भाषा के महत्व":के ऊपर दिए गए व्याख्यान से प्रभावित होकर उन्हें पुरस्कृत किया. लगभग 50 हज़ार लोगों के बीच जब यह करिश्मा सृष्टि ने किया तो न सिर्फ उसके स्वजन बल्कि सहपाठी और जानने वाले भी हर्ष से भर गए. 


दरअसल, वाराणसी में चल रहे संस्कृत संसद महोत्सव में भारत के अनेक संस्कृत विद्वानों ने भाग लिया, जिसमें अनेकानेक विषयों पर व्याख्यान हुआ. सृष्टि उपाध्याय ने संस्कृत भाषा के महत्व के ऊपर तकरीबन आधे घंटे तक व्याख्यान देकर सबको चकित कर दिया. इस व्याख्यान के बाद उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में उन्हें पुरस्कृत किया. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि निश्चय ही बिहार की प्रतिभा का आकलन हम सृष्टि की क्षमता को देखकर कर सकते हैं. इतनी कम उम्र में इन्होंने जो व्याख्यान दिया उसे सभी मंत्रमुग्ध हो गए हैं.कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा अन्य विद्वतजन भी मौजूद थे.

सृष्टि उपाध्याय वर्तमान में काशी स्थित अन्नदा देवी महाविद्यालय की आठवीं कक्षा की छात्रा हैं. 13 साल की सृष्टि कथावाचक बनना चाहती है. उनका कहना है कि सनातन की बारीकियां को लोगों के बीच रखना और उन्हें उसका महत्व बनाने के लिए यह जरूरी है. अपनी सफलता का श्रेय वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यनरत अपने चाचा शशि नाथ उपाध्याय को देती हैं. उनका कहना है कि उनके चाचा उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं, जिसके कारण आज वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुरस्कार पाने की उपलब्धि प्राप्त कर सकी हैं.



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